श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा हिंदी में । Shree Kashi Vishwanath Jyotirlinga History and Story in Hindi । जानें श्री विश्वनाथ मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व

 श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा हिंदी में । Shree Kashi Vishwanath Jyotirlinga History and Story in Hindi । जानें श्री विश्वनाथ मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व








यह ज्योतिर्लिंग उत्तर भारत में वाराणसी शहर में स्थित है ।   इस प्रसिद्ध नगरी को काशी भी कहा जाता है ।  


इस ज्योतिर्लिंग की कथा इस प्रकार है ।  


   निर्तिकार सैतन्य  एवं सनातन ब्रह्मा  ने प्रथम निर्गुण से सगुण  शिव रूप धारण किया और पुनः शिव शक्ति रूप से पुरुष - स्त्री भेद  से दो रूप धारण किए प्रकृति पुरुष (शक्ति शिव) को भगवान शिव ने उत्तम सृष्टि के लिए आकाशवाणी द्वारा तप करने का आदेश दिया तब उन्होंने तप  के लिए उत्तम स्थान निर्देश की प्रार्थना की तो निर्गुण शिव ने अपनी ही प्रेरणा के समस्त तेज संपन्न अत्यंत सौभायामान पंचकोशी नगर का निर्माण किया ।  वहां उपस्थित हो विष्णु जी ने बहुत काल तक शिव जी का ध्यान करते हुए तप किया ।   तब उनके परिश्रम से वहां उनके जल धाराओं प्रकट हो गई ।   इस अद्भुत दृश्य को देखकर विस्मित होते हुए विष्णु जी ने ज्योंही  सिर हिलाया त्यहि उनके कान में से एक मणि वहां गिर पड़ी ।   जिससे वह स्थान का नाम मणिकर्णिका तीर्थ पड़ गया ।   मणिकर्णिका के उस पांच (5 ) कोस विस्तार वाले संपूर्ण जल को शिव जी ने अपने त्रिशूल पर धारण किया ।  जिससे  विष्णु जी अपने  पत्नी  सहित सो गए और शिवजी की आज्ञा से उनकी नाभि कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई ।   ब्रह्मा जी ने शिवजी की आज्ञा से इस अद्भुत सृष्टि की रचना की जिसमें 50 करोड़ योजन विस्तार 14 लोक हैं  ।  अपने ही कर्मों से बंधे प्राणियों के उद्धार के विचार से शिव जी ने पंचकोशी नगरी को संपूर्ण लोकों से पृथक रखा ।   इस नगरी में शिव जी ने अपने मुक्तिदायक ज्योतिर्लिंग की स्वयं स्थापना की थी ।   जो इसे  कदापि नहीं छोड़ सकता ।   शिवजी ने पुनः उसी काशी को अपने त्रिशूल से उतारकर मृत्युलोक में स्थापित कर दीया ।  

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