श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा हिंदी में । Shree Kedarnath Jyotirlinga History and Story in Hindi । जानें श्री Kedarnath Dham मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व

IMAGE SOURCE DIVINE BHAKTI NEWS

 


 श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा हिंदी में


भगवान शिव शंकर के 11 वे फ्र ज्योतिर्लिंग हिमाच्छादित उत्तरान्चल प्रदेश के श्री केदारनाथ धाम के दिव्य तीर्थ में विधमान है।

    हिमाचल की देवभूमि में बसे इस तीर्थ स्थान के दर्शन केवल 6 महीने ही होते हैं। वैशाख से लेकर आश्विन तक की कालावधि ॐ में इस तीर्थ की यात्रा लोग कर सकते हैं। वर्ष 5 के अन्य महीनों में कड़ी सर्दी पड़ने से हिमाचल पर्वत का यह प्रदेश हिमाच्छादित रहने के कारण श्री केदारनाथ मन्दिर के पट दर्शनार्थियों के लिये बंद कर दिये जाते हैं। 


ज्योतिर्लिंग का इस तरह का जो आकार बना है उसकी अनोखी कथा इस प्रकार है।


      कौरव-पांडवों के युद्ध में अपने ही लोगों की अपनों द्वारा ही हत्या हुई। पापलाक्षन करने के लिए पांडव ॐ तीर्थ स्थान काशी पहुँचे परन्तु भगवान विश्वेशवर जी उस समय हिमालय के कैलाश पर गए हुए हैं।, यह 5 सूचना उन्हें वहाँ मिली। इसे सुन पांडव काशी से निकलकर हरद्वार होकर हिमालय की गोद में पहुँचे। दूर से ॐ ही उन्हें भगवान शंकरजी के दर्शन हुए। परन्तु पांडवों को देखकर भगवान शिव शंकार वहाँ से लुप्त हो गए। ॐ यह देखकर धर्मराज बोले-“हे देव, हम पापियों को देखकर शंकर भगवान लुप्त हुए हैं। प्रभु हम आपको ढूँढ निकालेंगे। आपके दर्शनों से हम पाप विमुक्त होंगे। हमें देख जहाँ आप लुप्त हुए हैं वह स्थान अब 'गुप्त काशी' के रूप में पवित्र तीर्थ बनेगा।" फिर पांडव गुप्त काशी (रूद्र प्रयाग) से आगे निकलकर हिमालय 45 के कैलाश, गौरी कुंड के प्रदेश में घूमते रहे और भगवान शिव शंकर को ढूँढते रहे। इतने में नकुल-सहदेव ॐ को एक भैंसा दिखाई दिया। उसका अनोखा रूप देखकर धर्मराज ने कहा, "भगवान शंकर ने ही यह भैंसे का रूप धारण किया हुआ है, वे हमारी परीक्षा ले रहे हैं।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ